“आस्था बनाम प्रशासन – मंदिरों के बीच ठेका, कोर्ट के आदेश हवा में”

हाईकोर्ट निर्देशों की खुली अवहेलना, मंदिरों के बीच संचालित हो रहा शराब ठेका, प्रशासन मौन
जोधपुर हाईकोर्ट की डबल बेंच के आदेश के बावजूद आबकारी विभाग और स्थानीय प्रशासन नहीं करवा पा रहे कार्रवाई
शिवगंज। शहर के मुख्य क्रांति चौराहे के समीप नगर पालिका की भूमि पर बीते लंबे समय से कंटेनर में संचालित हो रहा शराब ठेका अब शहरवासियों में विरोध का केंद्र बन गया है। यह ठेका सनातन धर्म के दो प्रमुख पूजा स्थलों (मंदिरों) के बीच स्थित है, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच रही है।

इस संबंध में स्थानीय नागरिकों ने कई बार विरोध प्रदर्शन कर प्रशासन को अवगत करवाया, यहां तक कि प्रभारी सचिव व जिला कलेक्टर तक को ज्ञापन सौंपकर मामले में कार्रवाई की मांग की गई, परंतु आज दिन तक ना तो आबकारी विभाग ने संज्ञान लिया और ना ही उपखंड स्तरीय अधिकारी ने कोई ठोस कदम उठाया है।
जानकारी के अनुसार, राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर की डबल बेंच ने हाल ही में जारी अपने 8 पेज के आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आबकारी नियमों के तहत प्रतिषिद्ध क्षेत्रों में स्थित किसी भी शराब की दुकान को तुरंत बंद किया जाए।

*हाईकोर्ट के आदेश में क्रमांक 13 पर यह भी उल्लेखित है कि*
“राजस्थान आबकारी नियम, 1956 के नियम 75 तथा पूर्ववर्ती निर्णयों के अंतर्गत ऐसे सभी शराब विक्रय स्थल जो महाविद्यालय, विद्यालय, अस्पताल, पूजा स्थल, सार्वजनिक मनोरंजन स्थल, श्रमिक या हरिजन बस्तियों, कारखानों तथा राष्ट्रीय या राज्य राजमार्ग से 500 मीटर के दायरे में आते हैं, उन्हें तत्काल बंद किया जाए।”
शिवगंज का यह ठेका ठीक इसी श्रेणी में आता है, क्योंकि इसके दोनों ओर धार्मिक स्थल हैं और यह क्षेत्र भीड़भाड़ वाला सार्वजनिक स्थान माना जाता है। बावजूद इसके, अब तक कार्रवाई न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

*स्थानीय नागरिकों का कहना है कि* शहर के धार्मिक व सामाजिक माहौल को देखते हुए यहां ठेका चलना न केवल असंवेदनशीलता है बल्कि यह हाईकोर्ट के आदेशों की खुली अवहेलना भी है। लोगों ने पुनः मांग की है कि कलेक्टर व आबकारी आयुक्त तत्काल संज्ञान लेकर शिवगंज स्थित उक्त ठेके को स्थाई रूप से बंद करवाएं, यह स्थान परिवर्तन कारायें ताकि धार्मिक स्थलों की गरिमा बनी रहे और आम जन में प्रशासन के प्रति विश्वास कायम हो सके।








