परोपकार ही धर्म है – संयम लोढा

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

रावल ब्राहमण समाज का पंचम स्नेह मिलन व विद्यार्थी सम्मान समारोह आयोजित

सिरोही। परोपकार ही धर्म है। अनेक ग्रंथो का भी अवलोकन करेगे तो हम यही पाएंगे कि परोपकार ही धर्म है। रावल ब्राहमण समाज ने परोपकार की तरफ तेजी से अंगीकार किया है। आज गौ सेवा के हम जहां भी प्रकल्प देखते है रावल ब्राहमण समाज की बहुत महत्वपूर्ण व बहुत बढ चढकर भागीदारी है और यह सभी चीजे दान पर सहयोग पर निर्भर करती है। दान की हमारी बहुत गौरवशाली परंपरा है। सनातन धर्म के हम सभी मजबूत स्तम्भ है। शिक्षा चाहिए तो हम माता सरस्वती से आशीर्वाद, शक्ति चाहिए तो माता दुर्गा का आशीर्वाद, धन के लिए माता लक्ष्मी का आशीर्वाद, स्वाभिमान चाहिए तो हम पार्वती का आशीर्वाद मांगते है। नारी शक्ति सर्वोपरी है। नारी का सम्मान हर जगह होना चाहिए, नारी का सम्मान जिस घर में होगा वो घर हमेशा सुख समृद्वि से भरा होगा।

मंडवारिया में रावल ब्राहमण समाज झोरा परगना सेवा समिति द्वारा समाज भवन में आयोजित पंचम स्नेह मिलन व विद्यार्थी सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे।

संयम लोढ़ा ने कहां कि मानव जीवन की पहली पाठशाला परिवार होती है। सच भी है, कोई बच्चा माता-पिता या परिवार के बड़े-बुजुर्गों की अंगुली पकड़कर ही दुनियादारी देखने और उसे समझने की शुरुआत करता है। लेकिन, इस तथ्य को भी नहीं भुला सकते कि माता-पिता या परिवार से प्राप्त शिक्षा सफलता की सीढ़ियां तो दिखा सकती हैं परंतु लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कुछ और भी चाहिए। बिना सही मार्गदर्शन के केवल ज्ञान या जानकारी के बूते कामयाबी के शीर्ष तक नहीं पहुंचा जा सकता। यह मार्गदर्शन सिर्फ गुरु ही दे सकते हैं। लोढ़ा ने महान दार्शनिक अरस्तू की हो या स्वामी विवेकानंद की, इनके समग्र दर्शन और व्यक्तित्व के पीछे गुरु कृपा का आलोक ही काम कर रहा था। स्वामी विवेकानंद ने तो स्वयं ही स्वीकार किया था कि यदि गुरु रूप में रामकृष्ण परमहंसजी नहीं मिले होते तो मैं साधारण नरेंद्र से ज्यादा कुछ नहीं होता। हर माता-पिता की चाहत होती है उनकी संतान श्रेष्ठ होकर शीर्ष तक पहुंचे। समय रहते बच्चों के लिए कोई योग्य गुरु ढूंढ़ दीजिए। वे वहीं पहुंच जाएंगे, जिस मुकाम पर आप उन्हें देखना चाहते हैं। हालांकि श्रेष्ठ गुरु मिल जाना भी इस दौर की बड़ी चुनौती है। तुलसीदासजी ने श्री हनुमान चालीसा की सैंतीसवीं चौपाई, ‘जै जै जै हनुमान गोसाई कृपा करहुं गुरुदेव की नाई’ लिखकर इस चुनौती को बहुत आसान कर दिया है। कोई अच्छा गुरु नहीं मिले तो हनुमानजी को ही गुरु और हनुमान चालीसा को मंत्र मान लीजिए। सफल कैसे हुआ जाए और सफलता मिल जाने के बाद क्या किया जाए यह हनुमानजी से अच्छा कोई नहीं सिखा सकता। गुरु रूप में उनकी जो कृपा बरसेगी वह आपका जीवन बदल देगी।

इस दौरान समाज की बालिकाओं एक एक बढ़कर एक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी एवं होनहार विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया।

इस अवसर पर अवधेश चैतन्य महाराज का सानिध्य रहा। इस दौरान पूरण पूरी महाराज ने भजन प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में किशोर रावल, दिनेश रावल, अर्जुन रावल, शिक्षाविद रमेश रावल, समाजसेवी दलपत रावल, गोयली पूर्व सरपंच मीरा देवी रावल, मांगीलाल रावल मौजूद रहे।संचालन भरत कुमार रावल ने किया।

Rajasthan Tv 24
Author: Rajasthan Tv 24

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें

Buzz4 Ai