पालिका में फिर लौट आया “पोपा बाई का राज” — ईओ के आते ही पालिका फिर पुराने ढर्रे पर

शिवगंज। नगर पालिका में रिश्वत कांड के बाद मची हलचल कुछ थमने लगी थी, पर लगता है पालिका की किस्मत को सुधार रास नहीं आया। दो महीने दस दिन बाद ईओ विनीता प्रजापत ने 11 अक्टूबर को जैसे ही कार्यभार ग्रहण किया, शिवगंज की पालिका फिर उसी पुराने ढर्रे पर जा पहुंची। वही रवैया, वही ढीलापन, वही “हमसे जो हो सकेगा, वही होगा” वाला अंदाज़।
कार्यभार संभालते ही अधिशासी अधिकारी विनीता का स्वागत फूल-मालाओं और आत्म-प्रशंसा के सागर में हुआ। दिन भर अपने चहेतों से घिरी रहीं और समाचार जगत में अपनी “साफ-सुथरी छवि” चमकाने के लिए कथा कथित सोशल मीडिया की पत्रकारिता करने वाले ख़बरनवीसों की टीम सक्रिय रही। खबरें कुछ इस लहजे में गढ़ी गईं, मानो उनकी अनुपस्थिति में पालिका अनाथालय बन चुकी थी और अब उनकी पुनः आमद से स्वर्ग के द्वार खुल गए हों।
नरेगा कर्मियों की समस्याएं सुनने का दिखावा भी खूब किया गया मानो दो महीने दस दिन की अनुपस्थिति का प्रायश्चित एक दिन में पूरा हो जाएगा। और फिर जैसे ही शाम ढली, बिना किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति के महोदया उसी गति से मुख्यालय छोड़ अपने मूल निवास जोधपुर की राह पकड़ लीं, जिस रफ्तार से कभी भ्रष्टाचार के बाद फाइलें गायब होती थीं।
जबकि फिलहाल पालिका में सेवा शिविर चल रहे हैं, और नियमानुसार कोई भी अधिकारी-कर्मचारी मुख्यालय नहीं छोड़ सकता। लेकिन नियमों की बात शायद अब “कहानी पुरानी” बन चुकी है।
अब तो लगता है, मानो शिवगंज की पालिका में “मेरी मर्जी” नाम का नया विभाग खुल गया हो, न जनप्रतिनिधियों को फर्क, न अधिकारियों को चिंता। जो करना है, वही होगा।
खैर, अब तो यही कहा जा सकता है —
“दो महीने में जो पटरी आशुतोष आचार्य ने बिछाई थी, उस पर अब फिर से पुराने ढर्रे की ट्रेन दौड़ पड़ी है।”
शिवगंज का भगवान ही मालिक है!
*मुझे नहीं है जानकारी*
मुझे न तो ईओ की और से कार्यभार ग्रहण करने और न ही मुख्यालय छोड़ने की जानकारी दी है। वैसे बिना अनुमति के कोई अधिकारी मुख्यालय नहीं छोड़ सकता।
नीरज मिश्र, उपखंड अधिकारी, एवं प्रशासक नगर पालिका शिवगंज


