*कहा था न… तुमसे नहीं हो पाएगा!*
ईओ मैडम का रविवार वाला वादा निकला ‘वायदा’, छावनी व शिवगंज में कचरा वैसे का वैसा!

रोहिडा आवास के नुक्कड़ पर
शिवगंज। नगर पालिका की किस्मत भी अजीब है, कभी रिश्वत कांड, कभी अवकाश कांड और अब ‘वादा कांड’। भ्रष्टाचार निरोधक विभाग की कार्रवाई के बाद महीनों तक अवकाश पर रहने वाली ईओ विनीता प्रजापत ने जब शुक्रवार को बड़े धूमधाम से कार्यालय में प्रवेश किया, तो लगा जैसे शिवगंज में “सुशासन का सूरज” उग आया हो। कैमरे चमके, मुस्कुराहटें बिखरीं और जनता को यकीन दिलाया गया कि अब सफाई ऐसे होगी जैसे जादू की छड़ी घूमी हो।
पर हुआ क्या? रविवार आया, गया, पर झाड़ू नहीं चली। नाली वहीं, दुर्गंध वहीं, बस फर्क इतना कि जनता अब ‘गंध’ से ज़्यादा ‘गफ़लत’ महसूस कर रही है।

गौशाला एसबीआई बैंक के पास
दरअसल, ईओ मैडम ने अवकाश पर जाने से पहले जिस ठेकेदार से सालभर का एग्रीमेंट कर रखा था, उसी का भुगतान रोककर ठेके को कोर्ट तक पहुँचा दिया। कोर्ट ने आदेश भी दे दिए, मगर मैडम तो अपनी ही धुन में थीं, शायद न्यायालय के आदेश से ज़्यादा भरोसा उन्हें अपनी “दूरदर्शिता” पर था। फिर एसीबी की कार्रवाई हुई और अचानक “बीमारी” आ गई, अवकाश का दौर शुरू हो गया।



जलदाय विभाग फिल्टर प्लांट, संतोषी नगर व तहसील रोड के पास
तीन महीने तक छावनी कचरे के पहाड़ में बदल गई। अब जब मैडम लौटीं तो वही पुराना राग अलापा गया “रविवार से सफाई शुरू होगी।” मीडिया को बयान मिला, फोटो छपे, फेसबुक पोस्ट बने… बस झाड़ू नहीं चली।

छावनी पेचका के पास बिखरा पड़ा कचरा
शाम तक जब शहरवासी झाड़ू की आवाज़ सुनने को तरस गए, तो ठेकेदार से बात की गई। उसने दो टूक कहा “न तो मैडम का फोन आया, न भुगतान मिला। घर के पैसे डाल कर कब तक सफाई करें?”

दादाबाड़ी स्कूल के पास
अब जनता सोच में है, क्या सफाई वाकई रविवार से शुरू होगी, या यह भी मैडम का “वादा जो कभी पूरा न हुआ” वाला एपिसोड था।
कुल मिलाकर शिवगंज फिर उसी पुराने ढर्रे पर है,मैडम के बयानों में स्वच्छता दिखती है, पर सड़कों पर नहीं।


